Trisha Tanisha
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दिशा-निर्देश
ज़रूरत के समय साथ – पैका वेतन अग्रिम सहायता दिशा-निर्देश उद्देश्य: हम मानते हैं कि जीवन में कभी-कभी वास्तविक आर्थिक आवश्यकताएँ आ सकती हैं। ऐसे समय में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और ज़िम्मेदारी के साथ साथ देना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य वेतन अग्रिम (Salary Advance) के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और विश्वास-आधारित व्यवस्था प्रदान करना है, ताकि टीम सदस्यों को समय पर सहयोग मिल सके और संगठन तथा टीम सदस्य, दोनों का आर्थिक संतुलन बना रहे। भावना: आर्थिक आवश्यकताएँ जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं। एक पैका परिवार के रूप में हम एक-दूसरे का सहयोग, सम्मान और विश्वास के साथ साथ देते हैं। हमारा उद्देश्य आवश्यकता के समय सहायता देना है, साथ ही ज़िम्मेदार वित्तीय योजना को भी प्रोत्साहित करना है, ताकि सभी का आत्मविश्वास, सुरक्षा और दीर्घकालिक कल्याण मज़बूत हो सके। सामान्य सहायता दिशा-निर्देश: स्थायी टीम सदस्य अधिकतम 3 माह के बेसिक वेतन + VDA (अधिकतम ₹1,00,000) तक का वेतन अग्रिम प्राप्त करने के पात्र होंगे। यह सुविधा संग्रक्षक/सेवक के माध्यम से उपलब्ध होगी तथा इसकी राशि का भुगतान अधिकतम 6 माह में किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों (जैसे शिक्षा, गंभीर बीमारी या विवाह) में निर्धारित सीमा से अधिक वेतन अग्रिम की आवश्यकता होने पर, मामले की समीक्षा बिजनेस हेड द्वारा की जाएगी। प्रशिक्षु (Trainees) एवं प्रोबेशन पर कार्यरत टीम सदस्य एक माह के स्टाइपेंड/वेतन तक का वेतन अग्रिम प्राप्त कर सकते हैं। इसकी वापसी अधिकतम 3 माह में की जाएगी। एक ही वित्तीय वर्ष में दूसरा वेतन अग्रिम केवल विशेष परिस्थितियों, जैसे टीम सदस्य या उनके निकट परिवार के गंभीर बीमारी, विवाह या शिक्षा के लिए, संबंधित टीम सेवक के माध्यम से तथा बिजनेस हेड से परामर्श के बाद ही दिया जाएगा। टीम सदस्य या उनके निकट परिवार के गंभीर बीमारी या विवाह के मामलों में, परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राशि की वापसी (Repayment) की आवश्यक समयावधि बिजनेस हेड द्वारा प्रदान की जा सकती है। वेतन अग्रिम के लिए स्वयं स्वीकृति (Self-Approval) या स्वयं अधिकृत करना (Self-Authorization) की अनुमति उपलब्ध नहीं है। दो वेतन अग्रिमों के बीच कम से कम 6 माह का अंतर होना चाहिए तथा आवश्यक है कि पिछले वेतन अग्रिम की संपूर्ण राशि का भुगतान हो चुका हो। इन दिशा-निर्देशों में किसी भी विशेष अपवाद या परिवर्तन के लिए बिजनेस हेड/ग्रुप लीड की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी. प्रोत्साहन सहायता…
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पीएम1 ने रचा नया कीर्तिमान!
जुलाई 2026 में 923.4 मीट्रिक टन उत्पादन के साथ पीएम1 ने अपने अब तक के सर्वाधिक मासिक उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि के साथ टीम ने अप्रैल 2026 में बने 913.77 मीट्रिक टन के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। यह सफलता उत्पादन, सर्विस, सेल्स तथा सभी सहयोगी टीमों और प्रबंधन के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट टीमवर्क का परिणाम है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सभी टीम सदस्यों को हार्दिक बधाई!
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वेट पल्प की नई उपलब्धि
जुलाई 2026 में वेट पल्प उत्पादन एवं बिक्री ने 1,326 मीट्रिक टन का नया रिकॉर्ड बनाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस प्रदर्शन के साथ दिसंबर 2025 में बने 1,210 मीट्रिक टन के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया गया। यह सफलता सभी संबंधित टीमों के समर्पण, सामूहिक प्रयास और उत्कृष्ट समन्वय का परिणाम है। इस शानदार उपलब्धि के लिए सभी टीम सदस्यों को हार्दिक बधाई। आइए, इसी उत्साह के साथ आगे भी नई ऊँचाइयों को छूते रहें।
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हम हैं एक ग्रेट प्लेस टू वर्क!
एक बेहतरीन कार्यस्थल केवल नीतियों से नहीं, बल्कि वहाँ काम करने वाले लोगों से बनता है। और इस बार हमारी टीम ने इसे सच साबित कर दिया है! हमें गर्व है कि पैका को ग्रेट प्लेस टू वर्क® इंडिया 2026–27 द्वारा मिड-साइज़ ऑर्गेनाइजेशन्स श्रेणी में ग्रेट प्लेस टू वर्क® का प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह सम्मान उस विश्वास, सम्मान, सहयोग और अपनत्व का प्रमाण है, जिसे हम सभी मिलकर हर दिन जीते हैं। इस उपलब्धि को और भी खास बनाता है यह तथ्य कि 95% टीम सदस्यों ने साझा किया कि पैका में शामिल होने के पहले ही दिन से उन्हें अपनापन महसूस हुआ। यह प्रमाणन केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का प्रतिबिंब है। यह हम सभी के साझा प्रयासों, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का परिणाम है। सभी टीम सदस्यों को हार्दिक बधाई! आइए, इसी विश्वास और उत्साह के साथ आगे भी मिलकर ऐसा कार्यस्थल बनाते रहें, जहाँ हर व्यक्ति सीख सके, आगे बढ़ सके और अपनेपन का एहसास कर सके।
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नेतृत्व से आगे की सीख: स्व-प्रबंधित टीमों की ओर एक प्रेरक यात्रा
पैका में निरंतर सीखने की संस्कृति भविष्य के लिए सक्षम टीमों के निर्माण की आधारशिला है। इसी दिशा में आयोजित एक प्रेरक नेतृत्व सत्र में टाइटन के पूर्व एचआर प्रमुख श्री एस. दीनदयालन ने विश्वास, स्वामित्व और उद्देश्य पर आधारित संगठन बनाने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने अनुभवों तथा Made in India – A Titan Story की प्रेरक यात्रा के माध्यम से बताया कि महान संगठन केवल व्यावसायिक रणनीतियों से नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाकर बनाए जाते हैं। पूरे सत्र का सबसे प्रभावशाली संदेश था— “नेतृत्व का अर्थ लोगों को प्रबंधित करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं का प्रबंधन करने योग्य बनाना है।” सत्र की प्रमुख सीख लोग, प्रक्रियाएँ और प्रणालियाँ हमेशा एक-दूसरे के अनुरूप हों। सच बोलने वालों को प्रोत्साहित करें। अग्रिम पंक्ति (Frontline) की टीम पर विश्वास करें, क्योंकि वही कार्य को सबसे बेहतर समझती है। ऐसी सामाजिक-तकनीकी (Socio-Technical) प्रणाली विकसित करें, जहाँ लोग और तकनीक साथ मिलकर आगे बढ़ें। कौशल ही वास्तविक शक्ति है, और यह शक्ति टीमों के पास होनी चाहिए। जॉब रोटेशन से बहुआयामी कौशल, गुणवत्ता की जिम्मेदारी और भविष्य के नेतृत्व का विकास होता है। STAR Model, Snake…
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मूल्य, उत्पादन और सफलता
जुलाई-26 हेतु राजस्व प्रोत्साहन (Revenue Incentive for July-26) व्यवसायवार राजस्व व्यवसाय मूल्य (₹) कुल (₹) रैप एंड कैरी शुद्ध राजस्व…
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हकीकत को करीब से समझते हुए: स्वच्छ पृथ्वी की ओर पैका का एक और कदम
“पर्यावरण की सबसे बड़ी सीख किताबों से नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को देखकर, उन्हें समझकर और समाधान का हिस्सा बनकर मिलती है।” पैका में सस्टेनेबिलिटी केवल एक प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि हमारा उद्देश्य है। “स्वच्छ पृथ्वी” के अपने संकल्प को साकार करने के लिए हम निरंतर जागरूकता बढ़ाने, जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसी उद्देश्य के साथ वेद सर के मार्गदर्शन में आयोजित इको-सेंसिटिविटी फील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम ने प्रतिभागियों को प्रस्तुतियों और चर्चाओं से आगे बढ़कर वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया। इस अनुभवात्मक प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने कचरा प्रबंधन प्रणालियों को करीब से देखा, पर्यावरण संरक्षण में जुटे लोगों से संवाद किया और यह समझा कि हमारी दैनिक आदतें पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं। हकीकत से रूबरू इस फील्ड विजिट में प्रतिभागियों ने लैंडफिल साइट, कचरे से प्रभावित जल स्रोत, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) का भ्रमण किया तथा सफाई कर्मियों और कचरा बीनने वाले साथियों से संवाद किया। लैंडफिल के दौरे ने बढ़ते कचरे की गंभीर चुनौती और उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से सामने रखा। यह अनुभव इस बात का सशक्त संदेश था कि हमारे द्वारा उत्पन्न किया गया कचरा कहीं गायब नहीं हो जाता, बल्कि उसकी जिम्मेदारी हम सभी की है। सफाई कर्मियों और कचरा बीनने वाले साथियों से हुई मुलाकात इस यात्रा का सबसे प्रेरणादायक अनुभव रही। उनके समर्पण, मेहनत और संघर्ष ने प्रतिभागियों को उनके अमूल्य योगदान का एहसास कराया और उनके प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत किया। जागरूकता से जिम्मेदारी तक इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल वास्तविकता को देखना नहीं था, बल्कि प्रत्येक प्रतिभागी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी का एहसास कराना भी था। इसने यह संदेश दिया कि पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हमारे छोटे-छोटे दैनिक निर्णयों और व्यवहार से होती है। पैका के उद्देश्य को जीते हुए इको-सेंसिटिविटी फील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम ने जागरूकता को व्यवहार में बदलने…
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संसाधन दक्षता की दिशा में एक और कदम
क्या छोटी-सी बचत भी बड़ा बदलाव ला सकती है? टीम भागीरथ इसी सोच को हकीकत में बदल रही है। टीम का लक्ष्य है रिकवरी प्लांट में अल्कली लॉस को 40% तक कम करना, ताकि केमिकल रिकवरी बेहतर हो और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके लिए टीम हर चरण का गहराई से अध्ययन कर रही है, मूल कारणों की पहचान कर रही है और ऐसे समाधान खोज रही है जो अनावश्यक नुकसान को रोक सकें। पक्का में नवाचार का अर्थ हमेशा कुछ नया बनाना नहीं होता, बल्कि हर दिन के काम को थोड़ा और बेहतर बनाना भी होता है। क्योंकि बड़े बदलाव की शुरुआत हमेशा छोटे-छोटे प्रयासों से होती है।
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पाइपलाइन में एक बदलाव, मेंटेनेंस हुआ आसान
हर चुनौती का समाधान बड़ा या जटिल हो, यह ज़रूरी नहीं है। कई बार एक छोटा-सा बदलाव ही पूरे काम को आसान बना देता है। मेंटेनेंस के दौरान MP Steam Pipeline को खोलने के लिए हर बार पाइप काटना पड़ता था। टीम ने इस प्रक्रिया को नए नज़रिए से देखा और पाइपलाइन में फ्लैंज (Flange) लगाने का समाधान अपनाया। अब पाइप काटने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मेंटेनेंस तेज़, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक हो गया। यह काइज़न हमें सिखाता है कि जब हम समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखते हैं, तो समाधान भी सरल और प्रभावी बन जाते हैं। सही सोच, सही सुधार और बेहतर परिणाम—यही है काइज़न की पहचान।
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हर ग्रीन लेबल पूरी सच्चाई नहीं बताता
क्या किसी पैकेजिंग पर “100% पुनर्चक्रण योग्य” लिखा होना ही उसे पर्यावरण के लिए बेहतर बना देता है? वेद कृष्णा…
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