
चिप्स के पैकेट से बने धूप के चश्मे और उद्देश्य से जुड़ा ब्रांड
क्या आपका खाली चिप्स का पैकेट धूप का चश्मा बन सकता है? और किसी ब्रांड का उद्देश्य भरोसे के काबिल कैसे बनता है? इस महीने Good Garbage में ऐसी दो बातचीत हैं, जो कचरे और कारोबार को देखने का हमारा नज़रिया बदल सकती हैं।
Without के संस्थापक अनिश मलपानी ने वेद कृष्णा से बातचीत में बताया कि उनकी कंपनी मुश्किल से रिसाइकिल होने वाले मल्टी-लेयर प्लास्टिक से धूप के चश्मे कैसे बनाती है। इस नई तकनीक के साथ बातचीत में कचरा बीनने वालों, उन्हें उचित भुगतान देने और ऐसे उत्पाद बनाने की बात भी हुई जिन्हें लोग खरीदना चाहें।

दूसरी बातचीत में BBMG के संस्थापक राफेल बेम्पोराड बताते हैं कि ब्रांड अपने काम से लोगों का भरोसा कैसे जीतते हैं। दोबारा इस्तेमाल होने वाले बाउल से लेकर ग्राहकों की आलोचनाओं को खुले तौर पर साझा करने तक, वे बताते हैं कि टिकाऊ तरीकों को रोज़मर्रा के कारोबार का हिस्सा कैसे बनाया जा सकता है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि चिप्स के पैकेट से चश्मा कैसे बनता है, या कोई ब्रांड अपने आलोचकों की बातें सार्वजनिक क्यों करता है? इन दोनों एपिसोड को ज़रूर सुनें।