पैका से जुड़ना और यहां अपने पहले महीने का अनुभव करना वास्तव में बेहद खास रहा। शुरुआत से ही मुझे महसूस हुआ कि यह केवल एक कॉर्पोरेट कार्यस्थल नहीं है। यहां की संस्कृति बिल्कुल अलग है, उद्देश्य से जुड़ी हुई है, और लोगों को खुलकर सोचने, सार्थक योगदान देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य बनाने का अवसर देती है।
जिस बात ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह थी कृषि अवशेषों से 100 प्रतिशत बायो कम्पोस्टेबल और पुनर्योजी उत्पाद बनाने की सोच। यह विचार अपने आप में बेहद शक्तिशाली लगता है। इसे अपनी पसंद से उपयोग करें, इसे महसूस करें, उपयोग के बाद इसे हरित ऊर्जा में बदलते देखें, और फिर इसे बिना कोई निशान छोड़े प्रकृति में विलीन होते हुए महसूस करें।
पैका में मेरी पहली यात्रा नोएडा फैसिलिटी टीम से मिलने की थी, और वहां का अनुभव मुझे भीतर से और युवा महसूस करा गया। इतनी ऊर्जावान, आत्मविश्वासी और विचारों से भरी टीम को देखना प्रेरणादायक था। उनकी सोच और काम करने का तरीका यह दिखाता है कि नई पीढ़ी किस तरह तेजी से बदलती दुनिया में व्यवसाय को नई दिशा दे सकती है।
मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे युवा लीडर्स भविष्य के लिए तैयार एक मजबूत शक्ति हैं। प्रणय, निहाल, सांची और पूरी टीम के साथ हुई बातचीत बेहद रोचक रही और इससे मुझे पैका को और गहराई से समझने का अवसर मिला। हालांकि शुभम से मुलाकात नहीं हो पाई क्योंकि वे यात्रा पर थे, लेकिन बाकी टीम की गर्मजोशी और ऊर्जा ने उनकी कमी महसूस नहीं होने दी।
इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए मुझे एक बात बहुत स्पष्ट महसूस होती है। अब समय है आगे बढ़ने का, नई संभावनाओं को तलाशने का, और धरती को जीवन जीने का एक नया तरीका देने का एक ऐसा जीवन, जो रूह के साथ जिया जाए।

