
दूसरी अतिथि, नामा निकोतारा (नेकेडपैक की संस्थापक), शैवाल आधारित खाने योग्य पैकेजिंग विकसित कर रही हैं, जो पैकेजिंग की आवश्यकता पर ही सवाल उठाती है। उन्होंने प्रयोगशाला विकास, खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता व्यवहार, प्रमाणन और शून्य कचरे वाले उत्पाद को बड़े स्तर पर लागू करने की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
ये दोनों चर्चाएँ मिलकर टिकाऊ पैकेजिंग की सोच का पूरा दायरा दिखाती हैं, एक ओर उन सामग्रियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने की कोशिश जो हम पहले से उपयोग कर रहे हैं, और दूसरी ओर यह सवाल कि क्या पैकेजिंग का अस्तित्व होना भी आवश्यक है। एक दृष्टिकोण सामग्री की सीमाओं के भीतर काम करता है, जबकि दूसरा उन्हें तोड़ने का प्रयास करता है। दोनों ही एक ही भविष्य की ओर संकेत करते हैं। स्थिरता विज्ञान, डिज़ाइन और मानव व्यवहार के साथ मिलकर ही संभव होगी।

